- अपनी प्रतिष्टा को भूलकर ,अकिंचन बनकर गुरू के दर दर पर सेवा करने से जो प्राप्ति होगी ,उसकी कोई बराबरी नहीं !
- सुधान्शुजी जी महाराज
Wednesday, August 2, 2017
अपनी प्रतिष्टा
Sunday, July 30, 2017
jigyasa aur samadhan
[http://jiggyaasa.blogspot.com/2011/04/blog-post_24.html?spref=bl ]
jigyasa aur samadhan: पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान क़ा मार्ग क्या हे ?: "जिज्ञासु : पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान क़ा मार्ग क्या हे ? महाराजश्री :-गुरु के प्रति श्रद्धा हे ,माता पिता के प्रति श्रद्धा हे
jigyasa aur samadhan: पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान क़ा मार्ग क्या हे ?: "जिज्ञासु : पुज्य गुरुदेव !ब्रह्मज्ञान क़ा मार्ग क्या हे ? महाराजश्री :-गुरु के प्रति श्रद्धा हे ,माता पिता के प्रति श्रद्धा हे
अंधेरे से बाहर
Saturday, July 29, 2017
jigyasa aur samadhan
jigyasa aur samadhan: पूज्य गुरूदेव मेरे घर में मैं मेरी पत्नी और मेरा ब...: " जिज्ञासु :- पूज्य गुरूदेव मेरे घर में मैं मेरी पत्नी और मेरा बड़ा बेटा तीन लोग कमाने वाले हैं !पैसा पर्याप्त है !साधन संपन्न हूँ !लकिन घ..."
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मनुष्य विचारों
मनुष्य विचारों से ही बना है। अगर हमारे विचार महान होंगे तो जीवन भी महान होगा। परम पूज्य सुधांशुजी महाराज |
Thursday, July 27, 2017
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