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Friday, February 6, 2015

मनुष्य की यही महिमा




"मनुष्य की यही महिमा हें कि वह स्वतन्त्र हें कर्म करने में और न करने में भी वह स्वतन्त्र हें और यही उसका विषाद भी हें । मनुष्य गलत करने में भी स्वतन्त्र हें । स्वतन्त्रता में गलत और सही दोनों की स्वतन्त्रता हें ।"

Thursday, February 5, 2015

दुनियाँ में चाहे कोई

"जंगल का राजा सिंह सबसे ज्यादा पराक्रमी, बलशाली और शक्तिशाली होता हें । इतना सामर्थ्यवान होने के बाद भी
उसके मुख में शिकार अपने आप आकर नहीं गिरता। उसे भी उठकर परिश्रम करना पड़ता हें ।
दुनियाँ में चाहे कोई कितना भी समर्थ हें या असमर्थ हें, निर्बल या बलशाली हें, हर एक को परिश्रम करना पड़ेगा,
अगर वह सफलता  प्राप्त करना चाहता हें"।

Wednesday, February 4, 2015

पैसे से








  • पैसे से आप बिसतर खरीद सकते हैं नींद नहीं

    पैसे से आप भोजन खरीद सकते हैं भूख नहीं


    पैसे से आप आदमी खरीद सकते हैं वफादारी नहीं

    पैसे से आप दवा खरीद सकते हैं सवासथ नहीं

    पैसे से आप किताब खरीद सकते हैं ज्ञान नहीं

    पैसे से आप पाउडर खरीद सकते हैं सुन्दरता नहीं

    पैसे से आप औरत खरीद सकते हैं पत्नी नहीं

    पैसे से आप शस्त्र खरीद सकते हैं होसला नहीं

    पैसे से आप मूर्ती खरीद सकते हैं भगवान नहीं

    पैसे से आप सुख साधन खरीद सकते हैं शांति नहीं

Tuesday, February 3, 2015

दुनियाँ में चाहे कोई



"जंगल का राजा सिंह सबसे ज्यादा पराक्रमी, बलशाली और शक्तिशाली होता हें । इतना सामर्थ्यवान होने के बाद भी
उसके मुख में शिकार अपने आप आकर नहीं गिरता। उसे भी उठकर परिश्रम करना पड़ता हें ।
दुनियाँ में चाहे कोई कितना भी समर्थ हें या असमर्थ हें, निर्बल या बलशाली हें, हर एक को परिश्रम करना पड़ेगा,
अगर वह सफलता  प्राप्त करना चाहता हें"।

Monday, February 2, 2015

लक्ष्य







  • जीवन साधना हे , लक्ष्य इश्वर हे , अधिकार कर्म करना हे !

आनन्द के फूल







परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

  • पूज्यश्री का कथन है -अपने जीवन को ऐसा संवारें की हर दिन होली और हर रात दिवाली बन जाए ! अर्थात आपकेजीवन में खुशी ,प्रेम व् आनन्द के फूल खिले और ज्ञान की ज्योति से जगमगाते रहें ! जो भी जीवन में आया हे उसे आनन्द के साथ बिताएं !सब अपने जीवन में रस और सुगंध को खोजें और उसे खुलकर आनन्द के साथ सबको लुटा दें ! जिससे जीवन के बयार बसंत की बहार बन जाए ! हर इंसान में आ जाएँ खुशी की कलियाँ ,उनमें खिल जाएँ आनन्द के फूल चारों और छा जाए प्रेम की सुगंध !

Sunday, February 1, 2015

आज से जिन्दगी को

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज



आज से जिन्दगी को व्यवस्थित करो, अनुशासित करो, योजनाबद्द तरीक़े से चलो व नियमित होने की चेष्टा शुरु कर दीजिए। आत्म सुधार व आत्मिक विकास के लिए आज से चेष्टा शुरु होनी चाहिए खुद से खुद का उद्धार कीजिए। अपनी कमजोरियो पर विजय पाइए। आज से शुरु हो जाइए "